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Iran US War: ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड फोर्ड पर 17 एंगल से किया हमला, हम जान बचाकर भागे; ट्रंप का खुलासा

 Published : Mar 28, 2026 01:04 pm IST,  Updated : Mar 28, 2026 01:21 pm IST

Iran-US War Iran: दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड पर ईरान ने भीषण हमला किया था। अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। यह खुलासा राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं किया है।

दुनिया का सबसे बड़ा अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड- India TV Hindi
दुनिया का सबसे बड़ा अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड Image Source : AP

Iran US War: ईरान ने दुनिया के ‘दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड पर 17 एंगल से बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इससे अमेरिकियों को अपनी जान बचाकर भागने को मजबूर होना पड़ा। यह खुलासा खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। इससे यह साफ हो गया है कि ईरानी मिसाइलों ने दुनिया में अभेद्य माने जाने वाले न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी सफल हमले करके अमेरिकियों को दहशत में डाल दिया। 

जान बचाकर न भागते तो सब खत्म हो गया थाः ट्रंप

ट्रंप ने एक विवादास्पद बयान में दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के सबसे शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड पर भारी हमला किया। ट्रंप ने कहा, "ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को 17 कोणों से मारा। हम अपनी जान बचाने के लिए भागे, यह सब खत्म हो गया था।" ट्रंप का यह बयान ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच आया है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा झटका बताया और ईरान की सैन्य क्षमता को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों ने कैरियर को चारों तरफ से घेर लिया था, जिससे जहाज पर अफरा-तफरी मच गई।

ईरानी मिसाइलों से अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर पर मचा दी थी अफरातफरी

ट्रंप ने कहा कि ईरानी मिसाइलों की घेरेबंदी से पूरे जहाज पर हलचल मच गई थी। हालांकि पेंटागन का कहना था कि यूएसएस जेराल्ड फोर्ड पर कोई ईरानी हमला नहीं हुआ। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, जहाज के मुख्य लॉन्ड्री एरिया (कपड़े धोने वाले कमरे) में आग लग गई थी, जो इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट या यांत्रिक गड़बड़ी के कारण लगी। आग लगभग 30 घंटे तक जलती रही, जिससे 600 से अधिक नाविकों को अपने बिस्तर छोड़कर फर्श और टेबलों पर सोना पड़ा। दो नाविकों को नॉन-लाइफ-थ्रेटनिंग चोटें आईं और दर्जनों को धुएं के कारण इलाज की जरूरत पड़ी। पेंटागन ने का दावा था कि यह आग युद्ध से संबंधित नहीं थी और जहाज अभी भी "पूर्ण रूप से मिशन कैपेबल" है। 

मरम्मत के लिए भेजा गया युद्धपोत

अमेरिकी युद्धपोत फोर्ड को फिलहाल मरम्मत के लिए ग्रीस के क्रेटे स्थित सौदा बे नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया गया। यह जहाज ईरान के खिलाफ रेड सी में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मुख्य प्लेटफॉर्म था, लेकिन अब मध्य पूर्व से हटकर मरम्मत कार्य में लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से चली आ रही तैनाती, क्रू थकान और रखरखाव की समस्याओं के कारण जहाज की लड़ाकू तैयारियों पर असर पड़ा है। ट्रंप प्रशासन इसे "लाइट इश्यू" बता रहा है, लेकिन विपक्षी नेता और कुछ सीनेटरों ने नौसेना की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। यह घटना अमेरिका-ईरान युद्ध के एक महीने में अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर पड़ रहे दबाव को उजागर करती है। फोर्ड जैसा 13 बिलियन डॉलर का अत्याधुनिक कैरियर युद्ध क्षेत्र से हटना अमेरिकी रणनीति के लिए चुनौती बन गया है। 

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